डॉ. परमानंद साहित्य के पारस पत्थर थे, जिसे छू लिया निखर गया: कृष्ण चंद्र लाल
गोरखपुर, सितम्बर 20 -- गोरखपुर, राजीव दत्त पाण्डेय। साहित्यकार प्रो. कृष्ण चंद्र लाल ने कहा कि डॉ. परमानंद श्रीवास्तव साहित्य के पारस पत्थर थे। उन्होंने जिस प्रतिभा को छू लिया, वह निखर गई। उनका पूरा व्यक्तित्व साहित्यिक था। रहन-सहन से लेकर पहनावे तक में उन्होंने स्तरीय साहित्यिकता बनाए रखी। उनके साथ विश्वविद्यालय आने-जाने के दौरान रिक्शे पर हर दिन साहित्य की बातें होती थीं, लेकिन कभी ऊब नहीं होती थी। बल्कि बिना पढ़े ही उनके साथ रहते हुए साहित्यिक रूप से समृद्ध होता गया। वह मेरे लिए रेडियो और टेलीविजन सब कुछ थे। प्रो. कृष्ण चंद्र लाल,'परमानंद श्रीवास्तव : अवदान और महत्व' विषयक राष्ट्रीय साहित्य गोष्ठी के प्रथम दिन शनिवार को दूसरे सत्र में उनके 'जीवन और कृतित्व' पर चर्चा कर रहे थे। इस सत्र की अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग क...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.