डॉलर-रुपये की अदला-बदली से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की तैयारी
नई दिल्ली, मई 21 -- नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने 26 मई को पांच अरब डॉलर की डॉलर-रुपया खरीद-बिक्री (डॉलर स्वैप) नीलामी करने की घोषणा की है। इसका मकसद बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ाना, रुपये पर दबाव कम करना और वित्तीय बाजार को स्थिर रखना है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब पश्चिम एशिया संकट, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा हुआ है। डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें बैंक अपने पास मौजूद अमेरिकी डॉलर आरबीआई को बेचते हैं। इसके बदले में आरबीआई बैंकों को रुपये उपलब्ध कराता है। तय अवधि पूरी होने के बाद बैंक उन्हीं डॉलर को आरबीआई से वापस खरीद लेते हैं। इस बार स्वैप की अवधि तीन वर्ष की होगी। इसका मतलब यह है कि बैंक तीन साल तक अतिरिक्त रुपये का उपयोग कर सकेंगे। यह भी पढ़ें- रसातल में ज...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.