मिर्जापुर, मार्च 3 -- मिर्जापुर। नगरपालिका अहरौरा की आधी आबादी को इलाज के लिए वाराणसी और अन्य शहरों में जाना पड़ता है। करीब छह दशक पहले स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार साबित हो रहा है। मरीजों की उम्मीदें टूट जाती है। एक्स-रे मशीन है, लेकिन तकनीशियन नहीं है। डॉक्टरों के कई पद काफी समय से खाली हैं। तीन डॉक्टर नियुक्त हैं और दो संविदा चिकित्सकों की नियुक्ति कर किसी तरह केंद्र संचालित किया जा रहा है। यह रेफरल अस्पताल साबित हो रहा है। स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है। जब यही बुनियाद कमजोर हो जाती है तब इसका असर व्यक्ति के आम जनजीवन पर पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अहरौरा इसका जीता जागता नमूना है। प्रतिदिन 300 से 350 मरीजों की ओपीडी होने के बावजूद...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.