डॉक्टर उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में ही रहेंगे
नई दिल्ली, सितम्बर 14 -- सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर और अस्पताल को उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में लाने वाले अपने 31 साल पुराने फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने 1995 के फैसले के खिलाफ दाखिल क्यूरेटिवक यानी सुधारात्मक याचिका खारिज करते हुए उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत डॉक्टरों और अस्पतालों की जिम्मेदारी पर अपनी आखिरी कानूनी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में ऐतिहासिक फैसला देते हुए चिकित्सा सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण के दायरे में लाया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति. प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पांच जजों की पीठ ने मेडिको लीगल सोसाइटी ऑफ इंडिया के डॉ. राजीव डी. जोशी की ओर से दाखिल सुधारात्मक याचिका को सिरे से खारिज कर दिया...
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