नैनीताल, अप्रैल 16 -- उत्तराखंड में एमबीबीएस के बाद पीजी करने वाले बांडधारी डॉक्टरों की पहाड़ पर सेवा को लेकर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि बांडधारी केवल तीन साल तक पहाड़ पर सेवा देंगे। इसके साथ ही मामले से जुड़ी अन्य सभी लंबित अर्जियां भी समाप्त कर दी गई हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी छात्र ने एमबीबीएस पूरा करने के बाद और पीजी में प्रवेश लेने से पहले दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दी है, तो उस अवधि को उनके पीजी के बाद की अनिवार्य तीन साल की सेवा अवधि में जोड़ा जाएगा। कोर्ट ने पिछले दिनों राज्य सरकार की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। खंडपीठ ने सरकार की चिंता को लेकर अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास बॉन्ड की राशि वस...