नई दिल्ली, फरवरी 25 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राजधानी में यमुना प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद एक बार फिर विभागों की आपसी खींचतान में उलझती नजर आ रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) के बीच तालमेल की कमी के कारण बारापुला नाले से होकर यमुना में गिर रहे गंदे पानी को रोकना चुनौती बना हुआ है। डीजेबी ने एनजीटी को बताया कि उसने आठ जेजे क्लस्टरों की पहचान की है, जहां से बिना शोधन का सीवेज सीधे नाले में छोड़ा जा रहा है। जल बोर्ड का कहना है कि वह इन स्थानों पर मॉड्यूलर विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाने को तैयार है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि डूसिब हर क्लस्टर से निकलने वाले सीवेज के लिए एकल डिस्चार्ज प्वाइंट उपलब्ध कराए...
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