चतरा, नवम्बर 21 -- सिमरिया निज प्रतिनिधि सिमरिया में नशा के गिरफ्त में मजदुरो के बाद अब युवा पिढी आते जा रहे है। आज हर समाज के बच्चें नशा के चंगुल में जकड़ चुके है। शाम होने के बाद इनकी मंडली सुनसान खेत, खलिहान, मैदान और श्मसान घाट में जमता है। यहां के साप्ताहिक बाजार में शराब के अलग से बाजार ही लगता है। जहां शराब के साथ मांस का काफी मांग रहता है। इस बाजार में हडिया मडिया के साथ देशी शराब भी बेचे जाते है। मजदुर तो अपने कमाई के आधी रकम शराब में ही दफन कर देते। जबकि युवा पीढ़ी शराब के साथ अफीम, चरस, ब्राउनसुगर, कफ सिरप, गांजा के शिकंजे में जकड़ते जा रहे है। नशा के लिए अब लोग घर के अलावा बाहर भी छोटी-छोटी चोरी करने लगे है। सिमरिया चौक से सटे कुटी गांव में शराब सेवन करने के कारण जवानी में ही लोग मौत के गाल में समा जा रहे है। गांव में आदिवासी और ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.