रिषिकेष, अप्रैल 15 -- एसआरएचयू में बुधवार को डीपफेक के युग में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस: अवसर, जोखिम और जिम्मेदार नवाचार विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस दौरान छात्रों को डिजिटल सामग्री की जांच के बिना भरोसा न करने की सलाह दी गई। जौलीग्रांट स्थित एसआरएचयू स्कूल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता नुसा पुत्रा विवि इंडोनेशिया के डॉ. टैडी मंटोरो ने किया। उन्होंने बताया कि डीपफेक तकनीक उन्नत एआई मॉडलों पर आधारित होती है, जो बड़े पैमाने पर डाटा का विश्लेषण कर वास्तविक जैसे दिखने वाले वीडियो, चित्र और ऑडियो तैयार करती है। उन्होंने जनरेटिव एडवर्सेरियल नेटवर्क जैसे मॉडलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तकनीकें नकली और असली सामग्री के बीच अंतर करना बेहद कठिन बना देती हैं। यह भी पढ़ें- गुजरात HC ने मेटा, गूगल और X स...
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