नई दिल्ली, अक्टूबर 15 -- गर्मी की दोपहर में एसी बंद हो जाए तो सबसे पहले किसकी याद आती है? किसी एमबीए की नहीं। उसी टेक्नीशियन की जिसके हाथ में औजार है और दिमाग में तकनीक। आज के दौर में यही हुनर कमाई का बड़ा जरिया बन रहा है। बड़ी डिग्री या एसी दफ्तर की कुर्सी हर बार जरूरी नहीं होती। इन्हें ब्लू-कॉलर जॉब कहते हैं। यानी वे काम जिनमें आदमी मशीन या वाहन या निर्माण स्थल पर सीधे हाथ चलाता है। लोग इन्हें कम तनख्वाह वाली नौकरी समझ लेते हैं। यह सोच अब पुरानी पड़ चुकी है। कुशल कारीगर और अनुभवी ऑपरेटर अच्छा पैसा बना रहे हैं। कुछ कामों में अनुभव बढ़ने पर महीने की आमदनी 50 हजार रुपये के पार भी जाती है। पर एक बात साफ रहे। यह सब शहर और अनुभव और काम के घंटों पर टिका है। ठेके का आकार भी मायने रखता है।एसी और फ्रिज की मरम्मत सबसे पहले बात एसी और रेफ्रिजरेशन क...