जमशेदपुर, फरवरी 26 -- डायन प्रथा जैसे सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए अब सहिया गांव-गांव में मोर्चा संभालेंगी। लोगों को जागरूक करेंगी कि यह एक सामाजिक बुराई है और इसे पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। डायन प्रथा एक गंभीर सामाजिक कुरीति और हिंसा का रूप है। इसे समाप्त करने के लिए लंबे समय से प्रयास हो रहा है, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है और आज भी महिलाएं इसका शिकार हो रही हैं। यह प्रथा मुख्य रूप से अंधविश्वास और ओझाओं पर निर्भरता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को प्रताड़ित करती है। इसे समाप्त करने के लिए झारखंड ने भी साल 2001 में कड़े कानून बनाए हैं। झारखंड में डायन प्रथा निवारण के लिए 2001 में बनाए गए कानून के तहत दोषियों को कड़ी सजा, आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन गांव में इस तरह की घटनाओं के मामले पुलिस थानों तक ...