ठेले की चूल्हे से जलती उम्मीद सुनीता देवी अपने बच्चों के सपनों की रोशनी
लातेहार, मई 11 -- चंदवा, प्रतिनिधि। मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष और अटूट विश्वास की मिसाल होती है। मदर्स डे के मौके पर चंदवा की सुनीता देवी की कहानी इसी सच्चाई को जीवंत कर देती है। इंदिरा गांधी चौक के समीप समोसे का ठेला लगाने वाली सुनीता देवी हर दिन मेहनत की आंच पर सिर्फ समोसे ही नहीं तलतीं, बल्कि अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपनों को भी संवारती हैं। यह भी पढ़ें- मां की ममता का कोई मोल नहीं, मां वो समुंदर है, जिसका कोई छोर नहींसुनीता देवी का संघर्ष निरक्षर होने के बावजूद सुनीता देवी और उनके पति ने यह ठान लिया है कि वे अपने बच्चों को वह सब देंगे, जो उन्हें कभी नसीब नहीं हुआ। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। दिनभर ठेले पर खड़े होकर काम करने वाली सुनीता देवी की आंखों में अपने बच्चों क...
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