किशनगंज, मार्च 8 -- किशनगंज। संवाददाता भारतीय समाज में परिवार नियोजन की जिम्मेदारी लंबे समय तक लगभग पूरी तरह महिलाओं पर ही डाल दी गई। नसबंदी हो या गर्भनिरोधक के अन्य साधन-अधिकांश मामलों में महिलाओं को ही आगे आना पड़ता है, जबकि पुरुष नसबंदी को लेकर समाज में आज भी डर, झिझक और कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। "कमजोरी आ जाएगी", "काम करने की ताकत चली जाएगी" या "लोग क्या कहेंगे"-ऐसे अनेक भ्रम वर्षों से पुरुषों को इस जिम्मेदारी से दूर रखते रहे हैं।लेकिन बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में एक आशा कार्यकर्ता ने इस सोच को चुनौती देते हुए समाज को एक नया आईना दिखाया है। ठाकुरगंज की आशा कार्यकर्ता उषा देवी ने न केवल पुरुष नसबंदी को लेकर फैली गलतफहमियों को तोड़ा, बल्कि लगातार दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर यह साबित किया कि यदि सही संवाद...
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