भभुआ, जनवरी 6 -- प्लास्टिक की छत और पुआल का बेड बनाकर फटे लेदरा व साड़ी का साटन ओढ़कर सड़क किनारे सोए मिले गरीब ओढ़ना को बेधकर शरीर के अंगों तक पहुंच रहे थे बर्फीली बयार के झोंके बगैर दरवाजा वाले एसएनसीयू के बगल के कक्ष में सोए दिखे मरीज के परिजन पूस माह खत्म होने पर माघ में भी फुटपॉथ पर रात काटनेवालों को सता रही ठंड तालाब के किनारे टेंट लगाकर सोने पर पूरी रात खांसते रह जा रहे हैं गरीब वृद्ध इंट्रो माघ की ठंडी रात। सड़कें वीरान। घना कोहरा। पेड़ के पत्तों से टप-टप गिरती ओस की बूंदे। इक्का-दुक्का आते-जाते वाहन। किसी तरह का कोई हलचल नहीं। ठंड से कुत्तों के रोने की आवाज। बर्फीली हवा तन के वस्त्र को बेध रही थी। खूब इंतजाम। फिर भी ठंड से लड़ना मुश्किल। हाथ-पैर ठिठुर रहे थे। मानो शरीर अकड़ जाएगा। सड़क पर न अलाव जल रहा था और न बेहतर ठौर-ठिकाना। कहीं लाइट ...