लखनऊ, सितम्बर 6 -- केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में बेहतर इलाज के लिए निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जा रही है। कैजुअल्टी में आने वाले मरीजों के इलाज और व्यवस्थाओं पर नजर रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारियों को दी गई है। वे समय-समय पर मरीजों के इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं की पड़ताल करेंगे। इसमें देखा जाएगा कि मरीज को एम्बुलेंस से उतारने से लेकर बेड तक पहुंचाने और इलाज शुरू होने में किसी तरह की अड़चन तो नहीं आ रही है। ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में 42 बेड हैं। ज्यादातर समय सभी बेड भरे रहते हैं। ट्रॉमा के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि 100 से अधिक मरीजों को स्ट्रेचर पर इलाज मुहैया कराया जाता है। भीड़ और सीमित बेड के बीच मरीजों को इलाज मिलने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। डॉ. प्रे...