नई दिल्ली, मई 28 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसले में 'ट्रॉमा केयर का अधिकार'- जिसमें चोट लगने की जगह से लेकर अस्पताल में मिलने वाले इलाज तक, जीवन बचाने की आपस में जुड़ी और समन्वित प्रक्रिया शामिल है, को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग बताया। यह पहला मौका है, देश में ट्रौमा केयर के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर मान्यता मिली।जस्टिस जेके माहेश्वरी और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशा-निर्देश जारी किया है। पीठ ने गैर सरकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर 'ट्रॉमा चेन ऑफ़ सर्वाइवल' यानी आघात से बचने की प्रक्रिया के बारे में कई दिशा-निर्देश जारी किया। यह भी पढ़ें- ट्रॉमा केयर अधिकार भी जीवन ...