देवघर, जून 1 -- टीबी मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में चिकित्सा विज्ञान और डिजिटल तकनीक का समन्वय नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। इसी कड़ी में मल्टीफेज एफएनएसी एडेड बाय टेलीपैथोलॉजी तकनीक को ट्यूबरकुलर लिम्फैडेनाइटिस (टीबी से प्रभावित लसीका ग्रंथियों की बीमारी) के प्रारंभिक एवं सटीक निदान के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक टीबी की पहचान की प्रक्रिया को तेज, सुलभ और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ट्यूबरकुलर लिम्फैडेनाइटिस एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी का एक सामान्य रूप है। जिसमें शरीर की लसीका ग्रंथियां प्रभावित होती हैं। कई बार इसके लक्षण सामान्य संक्रमण से मिलते-जुलते होने के कारण समय पर सही निदान नहीं हो पाता है, जिससे उपचार में देरी होती है। ऐसे मामलों में ...