वाराणसी, अक्टूबर 1 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के फाइब्रोस्कैन घाटाले की जांच पूरी हो गई है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में निजी कंपनी के रिसर्च एसोसिएट (टेक्निशियन) रत्नेश मौर्या को दोषी माना है। कमेटी ने उस पर मुकदमा दर्ज कराने और उससे गबन राशि के रिकवरी की सिफारिश की है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की दो नर्सों ने आईएमएस बीएचयू के निदेशक और एमएस से फाइब्रोस्कैन की फर्जी रसीद के जरिए जांच करने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर बाल रोग विभाग की प्रो. विनिता गुप्ता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने जांच में पाया कि फर्जी रसीद के माध्यम से पैसा अस्पताल के खाते में जमा करने के बजाए निजी कंपनी का टेक्निशियन खुद ही रख लेता था। रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ ती...