बागपत, मार्च 18 -- बागपत। हेपेटाइटिस यानि पीलिया। कई बार लोग इस रोग को हल्के में लेते हैं। झाड़फूंक कराने लगते हैं, लेकिन उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि यह टीबी से भी अधिक जानलेवा है। एक बार यह बिगड़ा तो जान का खतरा हो सकता है। बागपत जनपद की बात करें, तो प्रतिवर्ष 25 से अधिक लोग पीलिया रोग की चपेट में आकर जान गंवा रहे है। पीलिया मुख्यत: दो तरह का होता है। पहली श्रेणी में आते हैं हेपेटाइटिस- ए और ई। इसका वायरस 'फीको ओरल रूट' से आता है। यानि खानपान का रास्ता। शौच के बाद ठीक से हाथ न धोना, खुले में रखा खाना खाना। मक्खियां भी गंदगी पर बैठती हैं। वहां से वायरस लेकर खाने पर छोड़ जाती हैं। इसलिए ठेलों आदि पर खाने वालों को इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है। यह अधिकतम एक महीने में ठीक हो जाता है। इसके लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। दूसरा है हेपेटाइटिस- बी ...
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