जमशेदपुर, मई 28 -- टाटा वर्कर्स यूनियन में वर्तमान वेज रिवीजन अभी लंबित है, लेकिन पिछले वेतन समझौते को लेकर अब यूनियन में पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। यूनियन के व्हाट्सएप ग्रुप पर कमेटी सदस्यों ने अध्यक्ष पर डिप्टी प्रेसिडेंट रहते हुए 2012-15 के दौरान हुए समझौतों को लेकर सवालों की बौछार कर दी है। कमेटी सदस्यों ने आरोप लगाया कि उस दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए, जो पूर्ण रूप से मजदूर विरोधी थे। इनमें 25 एनएस ग्रेड के कर्मचारियों को सस्पेंड करवाना, 5 साल के ग्रेड रिवीजन समझौते को 7 साल का बनाना, 2014 में कैंटीन को वेंडर के हवाले करना, 2015 में 8.53 प्रतिशत का सबसे कम बोनस समझौता और 2016 में लगातार दूसरे वर्ष 8.6 प्रतिशत बोनस समझौता शामिल है। यह भी पढ़ें- टीएसडीपीएल की सभी यूनिटों में कर्मियों को मिलगी एक समान सुविधाएं इसके अलावा 2014 में ट्यूब...