फरीदाबाद, फरवरी 5 -- फरीदाबाद। मधुमक्खी के मोम से तैयार की गई मेटल मूर्तियों ने हरीश सोनी को देश-दुनिया में अलग पहचान दिलाई है। पारंपरिक बेल मेटल हैंडीक्राफ्ट आर्ट में दक्ष मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के हस्तशिल्पी हरीश सोनी आज उन चुनिंदा शिल्पकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने विरासत में मिली कला को न सिर्फ जीवित रखा, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने यह कला अपने पिता सुकई सोनी से सीखी, जो मोम के माध्यम से पीतल की मूर्तियां ढालने में माहिर थे। हरीश सोनी की कला की खासियत यह है कि वे किसी भी प्रकार का रेडीमेड मोल्ड इस्तेमाल नहीं करते। सबसे पहले वह मधुमक्खी के शुद्ध मोम से मूर्ति का पूरा ढांचा स्वयं तैयार करते हैं। यह प्रक्रिया अत्यंत धैर्य और बारीकी की मांग करती है। मोम से तैयार ढांचे के बाद उस पर विशेष लेप चढ़ाया जाता है और फिर भट्टी ...