प्रयागराज, जनवरी 15 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठे मुकदमों और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि पुलिस जांच में पाया जाता है कि एफआईआर झूठी सूचना के आधार पर दर्ज कराई गई थी, तो विवेचना अधिकारी के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह सूचना देने वाले के खिलाफ झूठी गवाही और गुमराह करने का लिखित परिवाद दर्ज कराए। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि विवेचक जांच के बाद यह पाता है कि आरोप झूठे थे और क्लोजर रिपोर्ट लगाता है, तो उसे सूचना देने वाले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 212 और 217 (आईपीसी की धारा 177 और 182 के समतुल्य) के तहत लिखित शिकायत दर्ज करानी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 1...
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