शिवम सिंह, मार्च 24 -- व्यक्तिगत दुश्मनी साधने के लिए अब झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले भी कानूनी शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। गलत तथ्यों के आधार पर कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज कराने का मामला हो या फिर सीधे थाने से एफआईआर का, दोनों में ही जांच के दौरान अगर तथ्य झूठे मिले तो कोर्ट में परिवाद दाखिल करना होगा। इस संबंध में उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेश के मुताबिक, यदि किसी एफआईआर में दर्ज तथ्य विवेचना के दौरान गलत पाए जाते हैं और पुलिस अंतिम रिपोर्ट लगाने का निर्णय लेती है, तो ऐसे मामलों में वादी और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से कार्रवाई होगी। उनके विरुद्ध बीएनएस की धारा 212 व 217 (पूर्व में आईपीसी की धारा 177 व 182) के तहत परिवाद न्यायालय में ...
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