देवरिया, जुलाई 10 -- देवरिया, रंजय कुमार पाण्डेय। साक्षर बनने को असाक्षरों में गजब का उत्साह है। आलम यह है कि बीते तीन वर्षों में जनपद में 57502 असाक्षर झिझक छोड़ कॉपी-कलम उठा लिए हैं। इन असाक्षरों ने यह साबित कर दिखाया है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है। बस जुनून की जरूरत है। बैंक हो या तहसील हर कागज-पत्र में पूर्व में असाक्षर कहे जाने वाले ये लोग अब अंगूठे की जगह हस्ताक्षर लगा रहे हैं। इससे जनपद की साक्षरता दर भी बढ़ गई है。

भारत सरकार का नव साक्षरता कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 से नव साक्षरता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत 15 वर्ष से उपर आयु वर्ग वाले असाक्षरों को वर्ष 2026-27 तक साक्षर बनाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पंजीकृत असाक्षरों को अनौपचारिक शिक्षा दी जाती है। इनके लिए 200 घंटे की मॉ...