नई दिल्ली, फरवरी 17 -- झारखंड के देवघर में 51 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर माली के रूप में काम करने वाले मोतीराम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया है। करीब 24 साल की सेवा और चार साल की कानूनी जंग के बाद 2026 में उन्हें यह राहत मिली। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया। देवघर के बंपास टाउन निवासी मोतीराम की नियुक्ति जून 2001 में देवघर मार्केटिंग बोर्ड में दैनिक वेतनभोगी माली के रूप में हुई थी। प्रशासनिक भवन के पास लगाए गए आम के 10 पौधों की देखभाल के लिए उन्हें रखा गया था। उस समय उनकी मजदूरी 51 रुपए प्रतिदिन तय की गई थी। वर्ष 2015 में मोती राम ने मजदूरी बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें मात्र 4346...