रांची, अक्टूबर 15 -- झारखंड में सरकारी धन के हिसाब-किताब और वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य में अंकेक्षण आपत्तियों और लंबित वित्तीय मामलों की राशि घटने के बजाय लगातार बढ़ी है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के दौरान यह राशि बढ़कर 18,060 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसमें गबन, वित्तीय दुरुपयोग, वसूली योग्य राशि, असमायोजित अग्रिम, अंकेक्षण आपत्तियां और जमा की जाने वाली राशि शामिल हैं। इतनी बड़ी राशि से जुड़े मामलों का निपटारा न होना सरकारी विभागों की वित्तीय जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।इससे पहले दर्ज थे 9,737 करोड़ इससे पहले 2001 से 2022-23 तक के लंबित मामलों में 9,737 करोड़ रुपये की राशि दर्ज थी। इस पर तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने 5 अक्तूबर 2023 को समीक्षा बैठक कर चिंता जताई थी और मार्च 2024 तक ...