जमशेदपुर, सितम्बर 16 -- बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने कहा कि जिस उद्देश्य से झारखंड का गठन हुआ था, वह अब भी अधूरा है। झारखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने जल, जंगल, जमीन, विकास और समृद्धि का जो सपना देखा था, वह अब तक पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है। वे सोमवार को परिसदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। आनंद मोहन ने कहा कि मूल रूप से वृहद झारखंड की परिकल्पना थी, जिसमें बिहार के साथ बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को शामिल किया जाना था। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और बिहार का विभाजन कर अलग झारखंड राज्य बना। झारखंड खनिज संपदा से भरपूर है, फिर भी गरीबी और बेरोजगारी राज्य के हिस्से में है। उन्होंने दो दशक पुरानी खनिज रॉयल्टी के पुनरीक्षण की जरूरत बताई। कहा कि बिहार के अलग होने के बाद उसके विकास को लेकर ...