झारखंड में कुदरुम बना जैव विविधता और सेहत का नया आधार
जमशेदपुर, अप्रैल 26 -- झारखंड की पारंपरिक फसल कुदरुम (हिबिस्कस सबदारिफा) अब राज्य की जैव विविधता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सेहत के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। लाल रंग की आकर्षक कलियों और खट्टे स्वाद के लिए प्रसिद्ध कुदरुम की मांग अब देश में तेजी से बढ़ रही है। हर्बल चाय, जैम, सिरप और अचार के रूप में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। दलमा और पलामू के जंगलों के आसपास इसके उत्पादन में लगातार इजाफा हो रहा है। वन विभाग अब इस फसल को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी में है। कुदरुम के पोषण और औषधीय गुणों को देखते हुए इसपर नए सिरे से शोध कराने की योजना है, जिसमें देहरादून के वानिकी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। यह भी पढ़ें- आमजन को औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी साथ ही कोल्हान क्षेत्र में इसे व्यावसायिक पहचान दिलाने के लिए विशेष कैंप लगाकर किसानों...
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