झारखंड को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बनाइए
नई दिल्ली, मई 21 -- महुआ माजी, सदस्य, राज्यसभा आज पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां और तेल उत्पादक देशों की राजनीति का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ रहा है। भारत जैसे देश इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सबसे अधिक परेशानी गरीब तथा मध्यम वर्ग को झेलनी पड़ती है। ऐसे समय में देश के भीतर मौजूद ऊर्जा संसाधनों का महत्व और बढ़ जाता है। इसी संदर्भ में झारखंड की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत के कुल कोयला भंडार का बड़ा हिस्सा झारखंड में है। दामोदर घाटी, झरिया, बोकारो और कर्णपुरा जैसे इलाके लंबे समय से देश की ऊर्जा व्यवस्था को शक्ति देते आए हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि झारखंड भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। पतरातू थर्मल पावर स्टेशन, एनटीपीसी नॉ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.