रांची, दिसम्बर 14 -- रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के एक प्रोफेसर-शोधकर्ता दल ने झारखंड की सदियों पुरानी मुड़मा मेला परंपरा से प्रेरणा लेते हुए 'को-प्रेन्योरशिप' (सह-उद्यमिता) की एक व्यापक और वैश्विक अवधारणा प्रस्तुत की है। यह पहली बार है जब इस अवधारणा को एक पूर्ण ढांचे में परिभाषित किया गया है, जिसे अब विश्वभर में व्यवसाय प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाया जाएगा। सीयूजे के व्यवसाय प्रशासन विभाग के प्राध्यापक डॉ. नितेश भाटिया और उनकी शोधार्थी डॉ. कनया महांती (जो वर्तमान में क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में प्राध्यापक हैं) ने अपने शोध के माध्यम से यह स्थापित किया है कि सह-उद्यमिता की जड़ें झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और ग्रामीण उद्यमिता में गहराई से समाहित हैं। शोध का व्यापक विश्लेषण उनके अध्ययन म...
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