झारखंड की आबादी बढ़ी पर आदिवासी की संख्या घटी
चतरा, जुलाई 10 -- चतरा/सिमरिया प्रतिनिधि। विश्व जनसंख्या दिवस पर जहां बढ़ती आबादी पर चर्चा होगी, वहीं झारखंड के मूल निवासी जनजातीय समुदाय और खासकर आदिम जनजातियों की घटती संख्या एक गंभीर चिंता बनकर उभरी है। आंकड़ों के अनुसार, एकीकृत बिहार के समय वर्ष 1951 में झारखंड के क्षेत्रों में आदिवासियों की आबादी लगभग 35.8 प्रतिशत थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर महज 26.2 प्रतिशत रह गई है। छह दशकों में आई इस 10 फीसदी की गिरावट के पीछे पलायन, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी मुख्य वजहें हैं। आदिम जनजातियों के अस्तित्व को बचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चतरा जिला प्रशासन द्वारा अब एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में सिमरिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) चंद्र देव प्रसाद ने प्रखंड की विभिन्न पंचायतों का दौरा कर बिरहोर परिवारों की स...
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