बोकारो, सितम्बर 22 -- कसमार , शेखर शरदेंदु । झारखंड के निर्माण की कहानी सिर्फ अलग राज्य बनने की नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, श्रम, सम्मान, पहचान और अधिकार के लिए चले लंबे जनसंघर्ष की कहानी है। इस संघर्ष में बिनोद बिहारी महतो का योगदान महत्वपूर्ण रहा। अधिवक्ता, समाज सुधारक, शिक्षाप्रेमी और जननेता के रूप में उन्होंने झारखंड आंदोलन को सामाजिक आधार देने का काम किया। उनका 'पढ़ो और लड़ो' का संदेश आज भी प्रासंगिक है। अलग झारखंड की मांग को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने में बिनोद बाबू की अहम भूमिका रही। 1973 में शिबू सोरेन और कॉमरेड ए.के. राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठन ने आंदोलन को नई राजनीतिक दिशा दी। चार फरवरी 1973 को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में हुई सभा आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव बनी।

बिनोद बाबू का शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण...