झंझारपुर कोर्ट के 46 वर्षों के इतिहास में पहली बार सुनाई गई फांसी
मधुबनी, जुलाई 2 -- झंझारपुर। दो मासूम बच्चों की हत्या के मामले में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को अभियोजन पक्ष ने ऐतिहासिक बताया है। विशेष लोक अभियोक्ता के सहयोगी अधिवक्ता जगदीश प्रसाद यादव ने कहा कि वर्ष 1981 में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय की स्थापना के बाद, पिछले 46 वर्षों में यह पहला अवसर है जब किसी मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। अधिवक्ता ने कहा कि जिस मां पर बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी, उसी के द्वारा प्रेमी के साथ मिलकर मासूमों की हत्या करना समाज के सबसे जघन्य अपराधों में से एक है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) अभिषेक रंजन ने इसे 'रेयर ऑफ रेयरेस्ट' की श्रेणी में रखते हुए बिल्कुल सही व कठोरतम फैसला दिया है。 यह भी पढ़ें- मां और प्रेमी को फांसी; अवैध संबंध में 4 साल के बेटे और डेढ़ साल ...
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