नई दिल्ली, अप्रैल 11 -- शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है। वे न्याय के देवता हैं और व्यक्ति के पिछले जन्मों के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। कुंडली में शनि की स्थिति व्यक्ति के जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। यदि शनि शुभ है, तो जीवन में अनुशासन, मेहनत और स्थिरता आती है, जबकि अशुभ होने पर साढ़ेसाती, ढैया या अन्य दोषों से व्यक्ति को कष्ट झेलने पड़ते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि की स्थिति जानने के कई तरीके हैं।शनि शुभ है या अशुभ, कैसे पहचानें? कुंडली में शनि की स्थिति देखकर आसानी से जाना जा सकता है कि वे शुभ हैं या अशुभ। यदि शनि अपनी उच्च राशि तुला में, स्वराशि मकर या कुंभ में, या त्रिकोण भाव (1, 5, 9) में बैठे हों और शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त कर रहे हों, तो उन्हें शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति अनुशासित, मेहनती और दीर्घकालिक सफलता प्रा...