धनबाद, मार्च 22 -- आईआईटी आईएसएम धनबाद में शनिवार को शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित शताब्दी व्याख्यान को संबोधित करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि आज के समय में बढ़ती उदासीनता समाज के लिए खतरा है। इसे करुणा के जरिए ही दूर किया जा सकता है। करुणा केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक सक्रिय शक्ति है, जो समाज को बदल सकती है। सत्यार्थी ने पेनमेन हॉल में आयोजित व्याख्यान में कम्पैशन क्वोशेंट (सीक्यू) की अवधारणा को रखते हुए कहा कि हर व्यक्ति को दूसरों के दुख को अपना समझकर कार्य करना चाहिए। बताते चलें कि कम्पैशन क्वोशेंट (करुणा गुणांक) किसी व्यक्ति की करुणा (सहानुभूति, संवेदनशीलता और मदद की भावना) को मापने का एक पैमाना है।अविनाश चंद्र एवं वीणानी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर सीरीज़ के तहत शताब्दी व्याख्यान में कैलाश सत्यार्थी ने विस्तार ...