बोकारो, अप्रैल 10 -- पेटरवार। ज्ञान वही है जो मनुष्य को अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य और उसके प्रयोजन की रक्षा करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दे। जिसके भीतर अपने अंतिम लक्ष्य समाधि संल्लेखना के प्रति जागरूकता होती है, वही व्यक्ति वास्तविक ज्ञानवर्धन करता है। ये उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने सम्मेदशिखर तीर्थराज की ओर मंगल विहार करते हुए पेटरवार जैन भवन में शुक्रवार को व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य के ज्ञान को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अपने जीवन के आचरण में उतारना चाहिए। जैसे भूख लगने पर भोजन करने में सुख मिलता है और यदि भूख न हो तो वही भोजन सुख नहीं देता, उसी प्रकार इन्द्रिय विषयों की भी एक सीमा है। इन्द्रियों से मिलने वाला सुख परिस्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए वह सीमित होता है। किंतु इन्द्रिय विषयों से परे हटकर जो सुख मिलता ...
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