ज्ञान मीमांसा भारतीय दर्शन का अभिन्न अंग
दरभंगा, जून 23 -- राजीव रंजन झा,दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग भारतीय ज्ञान मीमांसा के विविध आयाम विषय पर मंगलवार को एकल व्याख्यान का आयोजन हुआ। जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय के सह आचार्य डॉ. विकास सिंह ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय दर्शन में ज्ञान मीमांसा का विशेष महत्व है, इसलिए इसे दर्शन का अभिन्न अंग माना जाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि ज्ञान के संबंध में व्यवस्थित चिंतन जो स्वयं ज्ञान को विज्ञान का विषय मानता है, वही ज्ञान मीमांसा कहलाता है। भारतीय दार्शनिक प्रणालियों के विकास के दौरान ज्ञान मीमांसा में मीमांसकों की विशेष रुचि बढ़ी और इसने लगभग हर विचारधारा के दार्शनिक विमर्श में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया, क्योंकि दु:ख को भारतीय दर्शन में मुख्य समस्या माना जाता है। मानवीय दुख का मूल का...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.