सहरसा, फरवरी 9 -- सहरसा। रविवार को गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र आयोजित हुआ। सत्र को संबोधित करते हुए डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने सनातन धर्म के संबंध में कहा हमारे यहां हमेशा से कहा गया है कि सनातन धर्म है जिसका कोई न आदि है और न अंत है। सनातन का मतलब शाश्वत होता है। सिद्धार्थ नें यह नहीं कहा-यह धर्म मेरा है,उन्होंने कहा यह धर्म सनातन है। जीवन का नियय, जीवन कोजानना, पहचानना और समझना यही धर्म है। धर्म किसी ने बनाया नहीं। यही नियम है। जीवन का प्राकृतिक नियम है धर्म। जो सही अर्थो में धर्म को समझेंगे वह व्यक्ति धार्मिक कहलायेंगे,और अपने जीवन के उद्देश्य को भी प्राप्त कर पाएंगे। हम जहां से विकसित हुए वह है सरस्वती नदी। हमारी संस्कृति तो हिमालय थी। हिमालय से हीं गंगा आई वह भी भगीरथ के तप से। जहां नदी होगी जल का प्रवाह है वहीं स...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.