गाजीपुर, जनवरी 30 -- सादात, हिन्दुस्तान संवाद। संत पंकज महाराज की 83 दिवसीय शाकाहार-सदाचार मद्यनिषेध आध्यात्मिक जनजागरण यात्रा का 55वां पड़ाव ग्राम उकरांव पहुंचा। उन्होंने कहा कि यह दुर्लभ मानव शरीर युगों-युगों के बाद प्राप्त हुआ है। उन्होंने समझाया कि आंखों से जो कुछ भी दिखाई देता है, वह सब माया की छाया है और मृत्यु के समय यहीं छूट जाता है। मनुष्य शरीर ही परमात्मा को प्राप्त करने और साधन-भजन के माध्यम से अपने घर जाने का एकमात्र द्वार है। उन्होंने बताया कि इस मार्ग का भेद केवल संत महात्मा ही जानते हैं। इसे पाने के लिए पहले मानवतावादी बनना, मानव धर्म और मानव कर्म अपनाना आवश्यक है। मानव धर्म यह है कि इंसान इंसान के काम आए और एक-दूसरे की निःस्वार्थ भाव से सेवा करे। संत पंकज जी ने सत्य, दया, अहिंसा और परोपकार जैसे गुणों को जीवन में उतारने का ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.