जोधपुर, अक्टूबर 2 -- जोधपुर में इस बार दशहरा सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि एक अनोखी परंपरा का साक्षी भी बनेगा। जहां पूरे शहर में रावण के दहन की धूम है, वहीं कुछ लोग इस दिन शोक मनाएंगे। जी हाँ, जोधपुर में रहने वाले श्रीमाली समाज के गोधा गौत्र के लोग, जिन्हें रावण के वंशज माना जाता है, दशहरे के दिन जश्न के बजाय स्मृति और श्रद्धा के साथ अपने पूर्वजों को याद करेंगे। यह परिवार हजारों साल पहले श्रीलंका से भारत आया था। उनके पूर्वजों ने रावण की शादी जोधपुर में मंदोदरी से करवाई थी। शादी के बाद रावण और मंदोदरी पुष्पक विमान से श्रीलंका लौट गए, लेकिन उनके वंशज वहीं रुके और जोधपुर में बस गए। इस परिवार ने आज भी अपनी परंपराओं को निभाना नहीं छोड़ा। जोधपुर के किला रोड स्थित अमरनाथ महादेव मंदिर में पुजारी कमलेश दवे रावण के वंशजों की परंपराओं के संरक्षक हैं। उन्हो...
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