बिजनौर, जून 7 -- श्री दिगंबर जैन मंदिर में दूसरे दिन जैन मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि पहले हम लोग तीर्थ पर जाते थे। अपने बच्चों को संस्कार वहां और पुण्य आत्मा बनाते थे, परंतु आज धीरे-धीरे हम दूसरे दिशा में बढ़ रहे हैं। आज हमारे बालक देवालयों में जाने से परहेज कर रहे हैं। हमें उन्हें संस्कारवान बनाना होगा। जिस प्रकार हम बचपन में उन्हें स्कूल भेजते थे और विभिन्न तरह के प्रयास करते थे, ऐसे ही प्रयास उन्हें साधु संतों की सेवा करने के लिए और जैनालए जाने के लिए करने होंगे。

संकल्प का महत्व महाराज श्री दूसरे दिन दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संकल्प का बडा महत्व होता है हम बालक को कुछ बनना चाहते है। पर बालक कुछ और बन जाता है। उसके बाद आपके मन में विकल्प उठना है ऐसा नहीं होना चाहिए था। ऐसा नहीं होना चाहिए था...