जैसे नदी रुकावट देखकर रास्ता बदलती है वैसे ही.; कोर्ट ने महिला की सजा को बरकरार रखा
नई दिल्ली, जुलाई 26 -- बार-बार बयान बदलने पर दिल्ली की एक अदालत ने चेक बाउंस के मामले में एक महिला की सजा को बरकरार रखा है। एडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह ललेर उस महिला की अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने नवंबर 2024 में मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसे चेक बाउंस मामले में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये का मुआवजा देने या तीन महीने की साधारण जेल की सजा भुगतने का फैसला सुनाया था। जज ने 8 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि सच से पलटने पर बचाव का पक्ष हमेशा एक जैसा नहीं रहता। यह इनकार करने से शुरू हो सकता है। फिर कुछ शर्तों के साथ बात मानने तक पहुंच सकता है। और आखिर में एक बिल्कुल अलग कहानी बन सकता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई नदी अपने रास्ते में आने वाल...
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