मेरठ, फरवरी 18 -- हस्तिनापुर। विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए कैलाश पर्वत मंदिर में आयोजित 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के दसवें दिन मंगलवार को भगवान आदिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा की मांगलिक क्रियाएं मंत्रोच्चारण पूर्वक की गई। विधान में 85 परिवारों ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। विधान के आचार्य भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में प्रणाम ही सबसे बड़ा मंत्र है। मन, वचन व कार्य से समर्पित होकर किया गया नमस्कार ही फलदायी है। जब तक नमस्कार नहीं तब तक परमात्मा का पुरस्कार भी संभव नहीं है। विनम्रता मनुष्य को आयु, विद्या, यश और बल को प्रदान करता है। भगवान की शांतिधारा कमल कुमार संभव सेठी, स्वर्ण कलश अभिषेक अर्पित जैन, महेंद्र जैन ने किया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने भगवान को अर्घ्य समर्पित किए। सायंकाल में भगवान की आरती के पश...