जैन तर्कशास्त्र की बहुआयामी सोच आज भी प्रासंगिक : डॉ. शैलेंद्र
गया, जून 30 -- मगध विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में मंगलवार को "हिस्ट्री ऑफ जैन लॉजिक" विषय पर एक्स्ट्रा म्यूरल लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में जैन तर्कशास्त्र के ऐतिहासिक विकास, दार्शनिक आधार और समकालीन महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन तर्कशास्त्र भारतीय दार्शनिक परंपरा की अत्यंत समृद्ध एवं वैज्ञानिक विचार प्रणाली है, जिसका आधार अनेकांतवाद और नयवाद है। इनके अनुसार किसी भी सत्य या वस्तु को केवल एक दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता। भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित यह दर्शन सहिष्णुता, तार्किकता और बहुविध चिंतन की संस्कृति को विकसित करता है। वर्तमान समय में वैचारिक मतभेद और असहिष्णुता की चुनौतियों ...
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