रांची, अगस्त 27 -- रांची। विशेष संवाददाता लोहरदगा मंडल कारा से वर्ष 2006 में विचाराधीन कैदी के फरार होने के मामले में दोषी ठहराए गए तत्कालीन हेड वार्डन बिद्या भूषण शर्मा को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने ट्रायल कोर्ट की पांच साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि जेल मैनुअल में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना अलग बात है, लेकिन किसी अधिकारी को आपराधिक मामले में दोषी ठहराने के लिए अपराध के जरूरी तत्वों को साक्ष्यों से साबित करना जरूरी है। यह भी पढ़ें- पदनाम के आधार पर आपराधिक समन जारी नहीं हो : हाईकोर्टमामला विवरण मामला 20 मई 2006 का है। लोहरदगा मंडल कारा के वार्ड नंबर पांच में बंद विचाराधीन कैदी उदय नाथ उरांव उर्फ उदय जी दोपहर की गिनती में मौजूद था, लेकिन ...