बाराबंकी, मई 24 -- बाराबंकी। जिला कारागार के कैदी जैविक खेत से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। कैदी जेल के अंदर ही मौसमी सब्जियां उगा रहे हैं वो भी बर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) से। कृषि सिर्फ किसान या गांव तक ही सीमित नहीं है। यह नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का जरिया बना चुके हैं। इस क्षेत्र से जुड़कर अब पेशेवर युवाओं से लेकर बेरोजगार तक आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यहां तक कि अब जेल के कैदियों को भी खेती में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है। मौसमी सब्जियों की खेती करने के चलते बाराबंकी जेल के कैदी सुर्खियों में छाए हुए हैं। जिला कारागार में कैदियों की जीवनशैली बदलने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जेल अधीक्षक कुंदन कुमार का अहम योगदान है। इनके ही दिशा-निर्देशों पर निमदस संस्था के प्रबंध-निदेशक एसके वर्मा के सहयोग से किसानों की तरह कैदियों से भी विभ...