प्रमुख संवाददाता, सितम्बर 22 -- उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां एक जैसे फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (रेटिना) की बायोमेट्रिक समानता के चलते पहचान के संकट से जूझ रहीं जुड़वां बहनों को आखिरकार अलग पहचान मिल गई। रामपुर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इल्यास की जुड़वां बेटियों तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन में सॉफ्टवेयर, दोनों की शारीरिक पहचान को एक समान मान रहा था। एक बच्ची का कार्ड बनने के बाद दूसरी का डेटा डुप्लीकेट बताकर खारिज कर दिया जाता था। आधार आज स्कूल में दाखिले, सरकारी योजनाओं और कई नागरिक सुविधाओं के लिए जरूरी दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में दूसरी बेटी का पहचान पत्र नहीं बनने से पिता परेशान थे। समस्या का समाधान नहीं मिलने पर वह कलक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन में पहु...