वाराणसी, मार्च 22 -- वाराणसी। छावनी परिषद एवं दीपिका कल्चरल सोसाइटी ऑफ इंडिया की साप्ताहिक वरुणा संध्या भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को समर्पित रही। शहनाई और बांसुरी की सुरमयी जुगलबंदी से स्मृतिशेष उस्ताद को संगीतांजलि अर्पित की गई। भारत पर्यटन के सहयोग से आयोजित संध्या का मुख्य आकर्षण युवा शहनाई वादक मयस्सर अली, उस्ताद के पौत्र असद अली तथा बांसुरी वादक योगेंद्र कुमार (प्रवीण) की मनोहारी जुगलबंदी रही। कलाकारों ने राग मधुवंती को तीनताल में प्रस्तुत कर शास्त्रीय संगीत की गहनता और सौंदर्य का अद्भुत परिचय दिया। मिर्जापुरी कजरी की धुन 'घेरी-घेरी आई सावन की बदरिया' की प्रस्तुति ने वातावरण को लोक रंगों से सराबोर कर दिया। उस्ताद की प्रिय धुन 'गंगा द्वारे बधैया बाजे' ने पूरे परिसर को सजीव कर दिया। संगीत के माध्यम से उस्ताद की स्मृतियां जीवंत ह...