घाटशिला, फरवरी 18 -- जादूगोड़ा, संवाददाता। भारतीय विद्युत उत्पादन एवं आपूर्ति के क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा की एक निश्चित एवं निर्णायक भूमिका है। किसी भी राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास के लिए पर्याप्त विदयुत और अबाधित आपूर्ति का होना आवश्यक है। उक्त बातें बीएआरसी मुंबई के एसओएच डॉ. व्योम सक्सेना ने मंगलवार को यूसील जादूगोड़ा गेस्ट हाउस में आयोजित जन संपर्क कार्यक्रम में कहीं। डॉ व्योम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान में अपनी आशयित राष्ट्रीय परिनिर्धारित भागीदारी (आईएनडीसी) के एक भाग के रूप में भारत को लक्ष्य प्राप्त करना है। वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म विद्दयुत क्षमता का लक्ष्य है। वर्ष 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा से प्राप्त करना है। वर्ष 2070 तक नीवल शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य है, जबकि जी-20 द...
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