गढ़वा, मार्च 25 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। गढ़देवी मंदिर के निकट प्राचीन नरगिर आश्रम में नवरात्र के अवसर पर चल रही रामकथा के छठे दिन कथावाचक बालस्वामी प्रपन्नाचार्य ने राम वन गमन के कारण और उसके परिणामों पर चर्चा की। साथ ही कई व्यवहारिक उपदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि जीवों को कर्म फल भोगना ही पड़ता है। उससे कोई नहीं बच सकता। उन्होंने कहा कोई किसी को दुख या सुख नहीं देता है, बल्कि उसके लिए उसका कर्म ही जिम्मेवार होता है। सुख-दुख कर्म के कारण ही उत्पन्न होते हैं। एक उम्र के बाद बाल सफेद होने लगता है। प्रकृति संकेत देने लगती है कि अब आगे आप सचेत हो जाएं। विषयों से अनासक्त होकर ईश्वर और अध्यात्म की ओर रुचि बढ़ा देना ही विवेकशील पुरुषों के लक्षण बताए गए हैं।दशरथ जी ने दर्पण में अपने कान के बाल को सफेद देख कर अपना राजपद अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को देने क...
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