नई दिल्ली, अगस्त 31 -- क्या आपके कैमरे हमारे लोगों को वापस ला पाएंगे? काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के बाहर खड़ी एक महिला ने वहां मौजूद पत्रकारों से यह सवाल किया तो कुछ पल के लिए माहौल खामोश हो गया। उसके हाथ में अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें थीं और आंखों में अपनों के लौटने की उम्मीद। उन्होंने कहा कि उम्मीद के अलावा कुछ नहीं बचा है। 'नेपाली टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक दिल कुमारी मसरांगी मगर अस्पताल के गेट पर अपने लापता जीजा और भांजे की तस्वीरें लगा रही थीं। उसके आसपास मृतकों की तस्वीरें और अब भी लापता लोगों के नामों की लंबी सूची लगी थी। वह पत्रकारों से अपनी कहानी साझा करना चाहती थी, शायद इस उम्मीद में कि किसी ने कहीं उसके अपनों को देखा हो।कम से कम शव ही मिल जाए उन्होंने कहा कि उम्मीद करने के अलावा अब कुछ नहीं बचा...